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不能说的秘密

Gnesh Chaturthi 2025: गणपति जी की सूंड की दिशा क्या देती है संकेत? यहां जानें इससे जुड़े रहस्य_我的网站

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一 |      न्यूयार्क, एपी। पहले राउंड में हार के बाद दानिल मेदवेदेव के कोर्ट पर खराब व्यवहार के बाद अब बुधवार रात महिला सिंगल्स के दूसरे दौर में अमेरिका की टेलर टाउनसेंड और लातविया की जेलेना ओस्टापेंको के बीच कोर्ट पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। टाउनसेंड ने यह मैच 7-5, 6-1 से जीतकर तीसरे दौर में जगह बनाई।,मैच खत्म होते ही दोनों खिलाड़ियों ने नेट पर हाथ मिलाया, लेकिन इसके बाद दोनों वहां से जाने की बजाए कोर्ट के किनारे बहस में उलझ गईं। पूर्व फ्रेंच ओपन चैंपियन ओस्टापेंको ने टाउनसेंड पर अंगुली हिलाते हुए कहा कि उनके पास 'क्लास और शिक्षा नहीं है।',जब टाउनसेंड से एक पत्रकार ने पूछा कि क्या उन्हें ये टिप्पणी नस्लीय लगी तो टाउनसेंड ने कहा, मैंने इसे उस तरह से नहीं लिया। लेकिन यह सच है कि हमारे समुदाय को लेकर अक्सर 'अनपढ़' जैसी बातें कही जाती हैं, जबकि यह बिल्कुल गलत है। चाहे इसमें नस्लीय भाव रहा हो या नहीं, यह वही बता सकती हैं। मेरा ध्यान सिर्फ टूर्नामेंट में आगे बढ़ने पर है। इसके बाद ओस्टापेंको ने इंटरनेट मीडिया पर सफाई देते हुए लिखा, मुझे ढेरों संदेश मिले कि मैं नस्लभेदी हूं। लेकिन मैं कभी भी नस्लभेदी नहीं रही। मैं सभी को समान रूप से सम्मान देती हूं।,ओस्टापेंको ने टाउनसेंड पर 'अनुशासनहीन' होने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब टाउनसेंड को नेट कार्ड से अंक मिला तो उन्होंने 'सॉरी' नहीं कहा। इसके अलावा यह भी आपत्ति जताई कि टाउनसेंड ने मैच से पहले वार्मअप नेट के पास से शुरू किया, जबकि ज्यादातर खिलाड़ी बेसलाइन से शुरू करते हैं। इस पर टाउनसेंड का कहना था कि वह लंबे समय से वाली से वार्म-अप शुरू करती रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब ओस्टापेंको विवाद में रही हों।,2021 विंबलडन में अला टोमलजानोविच के खिलाफ हार के बाद भी उनके रवैये को लेकर विवाद हुआ था। दूसरी ओर टाउनसेंड हाल ही में डबल्स रैंकिंग में नंबर वन बनी हैं। सिंगल्स में वह फिलहाल 139वें स्थान पर हैं और 2019 के बाद पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम में पूर्व चैंपियन को हराने वाली सबसे निचली रैंक वाली अमेरिकी खिलाड़ी बन गईं।,यह भी पढ़ें- US Open: कार्लोस अलकराज के आगे नहीं टिक पाए मात्तिया बेलुची, एकतरफा रहा मुकाबला यह भी पढ़ें- US Open 2025: सिर मुंडवा कर कोर्ट पर पहुंचे अलकराज ने खेल से जीता दिल, फैंस ने नए लुक पर जमकर बजाई तालियां。    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित है। इस दौरान भक्त अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते हैं और उनकी पूजा करते हैं। वहीं, मूर्ति खरीदते समय कुछ लोग सोचते हैं कि गणपति जी की सूंड किस दिशा में होनी चाहिए? क्योंकि गणेश जी की सूंड की दिशा का विशेष महत्व होता है और यह अलग-अलग संकेत देती है। सूंड की दिशा के आधार पर ही मूर्ति को शुभ और अशुभ माना जाता है, तो आइए जानते हैं गणपति जी की सूंड (Ganpati Sund Direction Meaning) से जुड़े कुछ रहस्य।, ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, बाईं ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा को बहुत शुभ माना जाता है। इसे वाममुखी गणेश भी कहते हैं। इस तरह की मूर्ति को घर में रखना बहुत लाभदायक माना जाता है।,

  • महत्व - बाईं ओर सूंड वाली प्रतिमा सुख-समृद्धि और धन का प्रतीक होती है।
  • लाभ - इसे घर में स्थापित करने से परिवार में प्रेम और शांति बनी रहती है। साथ ही इस मूर्ति की पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती है। इसे गृहस्थ जीवन के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
  • स्थापित करने का नियम - इस तरह की मूर्ति को घर में कहीं भी स्थापित किया जा सकता है। इसे स्थापित करने के लिए बहुत सख्त नियमों का पालन नहीं करना पड़ता।
दाईं ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा को दक्षिणमुखी गणेश कहा जाता है। इस तरह की मूर्ति की पूजा करना बहुत शुभ होता है, लेकिन इसके लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है।,
  • महत्व - दाईं ओर सूंड वाली प्रतिमा को हठी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह भक्तों को सिद्धि और मोक्ष प्रदान करती है।
  • लाभ - इस प्रतिमा को घर में रखने से धन-संपदा आती है, लेकिन इसे स्थापित करने से पहले पंडित या वास्तु विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
  • स्थापित करने का नियम - दाईं ओर सूंड वाली मूर्ति की पूजा में विधि-विधान और नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है। अगर आप पूजा में कोई गलती करते हैं, तो इसके नकारात्मक परिणाम भी हो सकते हैं। इसलिए, इस तरह की मूर्ति को घर में रखने की सलाह कम दी जाती है।
भगवान गणेश की सीधी सूंड वाली प्रतिमा बहुत ही दुर्लभ मानी जाती है। यह प्रतिमा आमतौर पर बहुत कम मिलती है।,
  • महत्व - सीधी सूंड वाली प्रतिमा को सुषुम्णा गणेश कहा जाता है। यह व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और मानसिक सुकून देती है।
  • लाभ - इस तरह की प्रतिमा की पूजा करने से व्यक्ति को भगवान गणेश की पूर्ण कृपा मिलती है।
  • स्थापित करने का नियम - इस मूर्ति को भी स्थापित करते समय जानकार पंडित की सलाह जरूर लें।
यह भी पढ़ें- Ganesh Chaturthi 2025: गणेश उत्सव के दूसरे दिन करें ये काम, होंगे राजा की तरह धनवान,यह भी पढ़ें- Ganesh Chaturthi 2025: अगर गणेश चतुर्थी पर गलती से दिख जाए चांद, तो दोष से बचने के लिए करें ये उपाय अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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